Ziyarat E Nahiya In Hindi Jun 2026
ज़ियारत-ए-नाहिया सिर्फ एक प्रार्थना नहीं है, यह इमाम हुसैन (अ.स.) को लिखा गया एक प्रेम-पत्र है। यह वो आवाज़ है जो कर्बला के मैदान से नहीं, बल्कि शाम-ए-गरीबां (असीरों का काफिला) से निकली थी। जो कोई भी इसे दिल से समझता है, वह कर्बला को अपनी आँखों से देख लेता है।
यह जानकारी शिया इस्लामी मान्यताओं और स्रोतों पर आधारित है। धार्मिक अभ्यास से पूर्व अपने आस्था के विद्वानों या प्रामाणिक ग्रंथों से मार्गदर्शन अवश्य करें। ziyarat e nahiya in hindi
"अस्सलामु अलैका या अबू अब्दिल्लाह, अस्सलामु अलैका या حुसैन, अस्सलामु अलैका या खैर अन्नास, अस्सलामु अलैका या नूर अल्लाह, अस्सलामु अलैका या حجة الله, : The prayer expresses profound sorrow
: The prayer expresses profound sorrow, with lines such as, "Peace be upon the loneliest of the lonely" and "Peace be upon the one drenched in his own blood". 3. Ziyarat-e-Nahiya in Hindi & Roman Script with lines such as
विश्वास के अनुसार, यह ज़ियारत इमाम मेहदी (अ.स.) ने उस समय पढ़ी थी जब वे अपने पितरों के साथ मोहब्बत का इज़हार कर रहे थे। हालाँकि यह ज़ियारत दूर से है (नाहिया का अर्थ होता है - किसी तरफ या दिशा), लेकिन इसमें आध्यात्मिक तौर पर इमाम हुसैन (अ.स.) की मज़ार पर हाज़िर होने का एहसास होता है।
ऐसा माना जाता है कि इस ज़ियारत को इमाम महदी (अ.ज.फ.) ने अपने शिष्यों को सिखाया था। इसमें न केवल करबला के घटनाक्रम का ज़िक्र है, बल्कि इमाम हुसैन (अ.स.) के प्रति अत्यधिक प्रेम और उनके दुश्मनों के प्रति घृणा का इज़हार भी है।